#Gazal by Sanjay Ashk Balaghati

चल जिंदगी वैसे भी जीके देखते है

हंसकर जख्मो को सीके देखते है.

 

कहते है शराब कमाल की चीज है

आज दो-चार पैक पीके देखते है.

 

हजार ग़म दे,जो हंसके चला गया

एक-दो ग़म उसे जरा देके देखते है.

 

वो रोकर मुझे भूल जाने कह रही थी

कैसा लगता है चल रोके देखते है.

 

फरेब है सब,नही करना यकीं किसी पे

लोग लुटने तैयार है बस मौके देखते है.

 

वो एक ही नही है दुनियां मे हूर परी

उसे भुलना है तो किसी का होके देखते है.

 

मेरी आंख के पानी को न समझो आंसु

कुछ सपने ऐसे है जिसे धो के देखते है.

 

दिल की जमीं को कर गया है बंजर कोई

चल इस बार कोई फसल बो के देखते है

 

अपनो की बात अब मान लेते है अश्क

शादी का टेंशन खूद भी लेके देखते है.

संजय अश्क ,पुलपुट्टा

बालाघाट

Mo-9753633830

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