#Gazal By Sanjay Ashk Balaghati

दिल बडा हो गया है अब छोटा नही है
बात-बात पर पहले सा ये रोता नही है।

जैसे वो भूल गई है मै भी भूल गया हूं
उसके नाम से अब दर्द होता नही है।

टूटकर पुरी तरह बिखर गया हूं तो भी
फ़रेब खाकर फ़रेब मुझे आता नही है।

प्यार वफ़ा सब नाम के है आज जहां मे
वादें तो करते है पर कोई निभाता नही है।

और मजबूत हो गया हूं मै ठोकरें खाकर
अब कोई सयाना मुझे समझाता नही है।

बहुत गहराई से था दोस्तो ईश्क उससे
इसलिये आज भी कोई मन लुभाता नही है।

ग़म तो सबको है “अश्क” मोहब्बत मे यहां
किसी का दिखता है कोई दिखाता नही है।

संजय अश्क बालाघाटी
बालाघाट मप्र
7999840683

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