#Gazal by Sanjay Ashk Balaghati

भुले कैसे….

 

प्यार मे एक रोज होता ही है ऐसे,

चल छोड जाने दे,भुल जा अब उसे.

 

कभी-कभार अकेले भी रोना होता है,

संग उसके तो है जिंदगी भर हंसे.

 

उसका छोड जाना एक दिन तय था,

योग्यता के साथ-साथ होना  था पैसे.

 

ईश्क तो दिवानो की तरह किया था,

अब समस्यां है उसे भुले तो भुले कैसे.

 

हर इंसान का यहां ईश्क का रोना है,

दर्दे दिल अपना भला बताये किसे.

 

मेरा ही दुश्मन निकला,एतबार मेरा,

जिंदा मार गया वो,मैने चाहा जिसे.

 

दरबदर भटक रहा हुं,उसे भुलाने,

और वो है कि मेरे अंदर ही है बंसे.

 

समझ नही आ रहा पुजा करू किसकी,

अब तो रब मे भी दिखता है वो जैसे.

 

संजय अश्क बालाघाटी

मो-9753633830

 

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