#Gazal by Sanjay Ashk Balaghati

उसे पाकर ग़र लुट भी गया तो क्या

सपना दिल का टूट भी गया तो क्या।

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जिंदगी अपना रास्ता खूद डूंड लेती है

वो सफर मे ग़र छुट भी गया तो क्या।

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है काम आदमी का आदमी के काम आना

उसे गिराकर ग़र मै उठ भी गया तो क्या।

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सच बोलकर दुश्मन ही कमाया है मैने

दोस्ती मे बोल एक झुठ भी गया तो क्या।

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हर कदम पर फरेब करता रहा वो मुझसे

अब उससे रिस्ता टूट भी गया तो क्या।

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जिंदगी तो फटे कपडो पर गुजर गई अपनी

अब सिलाकर वो सूट भी गया तो क्या।

प्यार की दौलत से सदा आबाद रहा अश्क

जमीन-जायदाद से लुट भी गया तो क्या।

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