#Gazal by Sanjay Ashk Balaghati

उसे पाकर ग़र लुट भी गया तो क्या

सपना दिल का टूट भी गया तो क्या।

….

जिंदगी अपना रास्ता खूद डूंड लेती है

वो सफर मे ग़र छुट भी गया तो क्या।

….

है काम आदमी का आदमी के काम आना

उसे गिराकर ग़र मै उठ भी गया तो क्या।

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सच बोलकर दुश्मन ही कमाया है मैने

दोस्ती मे बोल एक झुठ भी गया तो क्या।

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हर कदम पर फरेब करता रहा वो मुझसे

अब उससे रिस्ता टूट भी गया तो क्या।

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जिंदगी तो फटे कपडो पर गुजर गई अपनी

अब सिलाकर वो सूट भी गया तो क्या।

प्यार की दौलत से सदा आबाद रहा अश्क

जमीन-जायदाद से लुट भी गया तो क्या।

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