#Gazal by Satish Vishwakarma anand (Vishal Shukla)

बैठे रहो तुम जब तलक ये साँस चलती है
थामे रहो तुम हाथ जब तक रूह मचलती है
आओ एक दुजे से हाल – ए – दिल कहें
यूँ ही गुज़ारें वक़्त जब तक शाम ढलती है
कश्म-कश में ज़िंदगी है क्या कहें दिलबर
तुमने मिले बिन अब नही तबीयत सम्हलती है
हमने सुना है इम्तिहां जब वक़्त लेता है
हर किसी की तब यहां किस्मत बदलती है
बारहा “आनंद ” से तुम ना मिलो हमदम
क्या बताऊँ किस क़दर दुनिया ये जलती है…
सतीश विश्वकर्मा आनंद
त्रिलोकी नगर छिन्दवाड़ा

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