# Gazal by Seema Pathania Katoch

कभी पानी तो कभी आग देखते हैं

हम तेरी आँखों में एक रेगिस्तान देखते हैं

 

भटक न जाएं इस भूल भुलैया में

इसलिये बाहर से ही भीतर के तूफान देखते हैं

 

तुम करती हो गिला मेरी बेरुखी का

और हम अपनी रिहाई के  आसार देखते हैं

 

समझाया बहुत हमने खुद को लेकिन

अब हम भी सहरा में ही बहार देखते हैं

 

Leave a Reply

Your email address will not be published.