#Gazal by Shailesh Inayat

हम बेवफ़ाओ के दिल ढूँढने मे लगे है

जख्म दिये जिससे वो कील ढूँढने मे लगे है

तनहाई से मोह्ब्बत करना सीख लिया

सुकून मिले जहाँ वो झील ढूँढने मे लगे है

बेईमानो ने बेईमानी इतनी बढा दी इनायत

नोच सके इन्हे वो चील ढूँढने मे लगे है

अजीब शख्स है वो उसकी जरूरत देखिये

ताड़ बन जाये वो तिल ढूँढने मे लगे है

शैलेश ‘ इनायत ‘

हास्य व्यंग कवि शायर

 

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