#Gazal by Shailesh Inayat

तेरे इश्क के चक्कर मे कपडे धो रहा हूँ

निंद आती नही पर जबरन सो रहा हूँ

तेरे खुबसुरत मुखडे को अपना समझ बैठा

अब बेवफाई का सरेआम दुखडा रो रहा हूँ

तेरी गली से गुजरने का  मन नही करता

तेरे वास्ते इलजामो को सिर पर ढो रहा हूँ

लाख नफ़रत सीखा ले सियासतदार मुझे

मोहब्बत का दीवाना हूँ मोहब्बत बो रहा हूँ

 

शैलेश ” इनायत ”

हास्य व्यंग कवि शायर

Leave a Reply

Your email address will not be published.