#Gazal by Shanoo Bajpai

” गजल”

पहले थोड़ा आनाकानी कर।
फिर अपनी मनमानी कर।

याद रखेंगी तुमको दुनिया।
जिंदा अपनी कहानी कर।

जीना चाहो खुदको खुलकर।
यारो बेफिक्र जवानी कर।

शानो शौकत की चाहत हो।
फिर तो थोड़ी बेमानी कर।

बाते सुनना या न सुनना।
बस चेहरे पर हैरानी कर।

कहाँ जा रही है ये पीढ़ी।
बच्चो की निगरानी कर।

पाँच साल मे सेवा करना।
देश की फिर परधानी कर।

सेवक बनने की चाहत हो।
रिश्तो की अगवानी कर।

हर मजहब से नाता रखना ।
मन अपना हिन्दुस्तानी कर।

“शानू बाजपेई,अपूर्व”

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