#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

उनको तो हमारे, अहसानो वफ़ा याद नहीं !

हम मुज़रिम हैं उनके, मगर दफ़ा याद नहीं !

 

मोहब्बत के नाम पर मिला सिर्फ धोखा हमें,

दोस्ती की किताब का, कोई सफ़ा याद नहीं !

 

यूं ही ज़िल्लतों में काटी है ये उम्र हमने सारी,

थे कितनों से खुश, कितनों से ख़फा याद नहीं !

 

“मिश्र” दब गए उनके कसूर दौलत के ढेर में,

हमें कितना हुआ, नुकसान ओ नफ़ा याद नहीं !

 

 

शांती स्वरूप मिश्र

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