#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

कैसे गुज़रती हैं सुबहो शाम, क्या बताएं !

किस तरह बिखरते हैं अरमान, क्या बताएं

 

शहर की हवाएं भी हो चुकी हैं विषैली अब,  

कैसे बरसता है ज़हर सरेआम, क्या बताएं !

 

खुदगर्ज़ है दुनिया जीना मुहाल है अब तो

अब कैसे उलझता है हर काम, क्या बताएं !

 

रही शर्मो हया अब आँखो में किसी की,  

कैसे उछलती हैं इज़्ज़तें बेदाम, क्या बताएं !

 

दुनिया फसादों का गढ़ बन चुकी हैमिश्र“,

क्या क्या करा देती है बदजुबान, क्या बताएं !

 

शांती स्वरूप मिश्र

 

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