#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

बिखरे हैं किस्मत के तार, जाने कहाँ कहाँ !

भटकते रहे हम तो बेकार, जाने कहाँ कहाँ !

 

बदलते रहे रास्ते हमतो मंज़िल की तलाश में,

मगर पहुंचा दिया हर बार, जाने कहाँ कहाँ !

 

आये थे इस शहर में कुछ पाने की ललक में,    

मगर यूँही होते रहे लाचार, जाने कहाँ कहाँ !

 

ज़िन्दगी तो खेल है मगर आसां नहीं है इतना

जीत कर भी मिलती है हार, जाने कहाँ कहाँ !

 

मत समझोमिश्रदुनिया को फूलों का चमन,

अब तो फैले हैं कांटे बेशुमार, जाने कहाँ कहाँ !

 

शांती स्वरूप मिश्र

Leave a Reply

Your email address will not be published.