#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

कभी बात भी होगी, कभी बेबात भी होगी,

ज़िन्दगी लम्बी है यारो, मुलाक़ात भी होगी !

ग़मों के सिलसिले न रुकेंगे कभी भी दोस्त,

कभी न कभी, खुशियों की बरसात भी होगी !

ज़िंदगी की राहें ज़रा सा संभल कर चलिए,

स्वागत में उधर, काँटों की बारात भी होगी !

ये खेल है ज़िन्दगी का ज़रा हिम्मत से खेलिए,

कभी जीते हो ठाठ से, तो कभी मात भी होगी !

आँखें खोल कर रखना ज़रा अपनों से “मिश्र”,

सामने से मोहब्बत, पर पीछे से घात भी होगी  !

शांती स्वरुप मिश्र

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