#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

जब चाहा तो पत्थरों कोभगवान् बना दिया !

जब चाहा तो घर आँगन कीशान बना दिया !

 

कितना मतलब परस्त है दुनिया का आदमी,    

जब मतलब निकल गयातो अंजान बना दिया !

 

मुझको हक़ नहीं अब अपनों को राय देने का

यारो अपने ही घर में मुझेमेहमान बना दिया !

 

बड़ी हसरतों से निभाया था हर रिश्ता मगर,

ज़िन्दगी को इस आदत नेशमशान बना दिया ! 

 

कहने को हम क्या कहें उन बेख़बर लोगों से,

जिन्हें खुद की फ़ितरतों नेशैतान बना दिया !

 

गर मोहब्बत भी करे कोई तो कैसे करे “मिश्र“,

उसको भी आज लोगों नेअहसान बना दिया !

 

शांती स्वरुप मिश्र

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