#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

ख़ुद ही काँटों भरे ये रास्ते, हम बनाते क्यों हैं !

यारो पत्थर दिलों से रिश्ते, हम निभाते क्यों हैं !

जब जानते हैं दुनिया की बेरुख़ी का आलम,

तो औरों को खुद उजड़ के, हम बसाते क्यों हैं !

न समझता है कोई भी औरों की मुश्किल यारो,

तो दिल में औरों के दर्दो ग़म, हम बिठाते क्यों हैं !

ज़रा सी बात पर कभी अपने पराये नहीं हो जाते,

फिर दुश्मनों से दिल आखिर, हम लगाते क्यों हैं !

जो खड़ा था कभी साथ साथ हर कदम पे “मिश्र”,

सबसे ज्यादा ही दिल उसका, हम दुखाते क्यों हैं !

शांती स्वरूप मिश्र

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