#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

हमको बेसबब, सर खपाना बुरा लगता है !

ज़रा सी बात पे, आंसू बहाना बुरा लगता है !

 

जो दिल और चेहरे को रखते हैं दूर ही दूर , 

उन शातिरों कोमुंह लगाना बुरा लगता है !

 

मदद के नाम पे किसी को ठगो मत यारो , 

किसी की बेबसी को, भुनाना बुरा लगता है !

 

आज जो हम पे है कल किसी और पे होगी ,

हमें दौलत का दमदिखाना बुरा लगता है !

 

ये अजब सा दौर है मक्कारियों का “मिश्र“,

पर किसी मासूम को, सताना बुरा लगता है !

 

शांती स्वरूप मिश्र

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