# Gazal by Shanti Swaroop Mishra

 रुको दोस्त बस चलते जाओमंज़िल दूर नहीं  ;

मत करो याद मंझधार को तुमसाहिल दूर नहीं  !

कोई नहीं जो करे मददतुम्हें खुद ही लड़ना होगा ; 

क्यों करते बेकार मननतुम्हें खुद ही बढ़ना होगा !

कट ही चुका है तम का रस्ताझिलमिल दूर नहीं  ;

मत करो याद मंझधार को तुमसाहिल दूर नहीं  !

 

जीवन के रस्ते सहज नहींये तो टेड़े मेढे पथरीले ;  

हर तरफ मिलेंगे लोग तुम्हेंविषधर जैसे ज़हरीले  !

इनसे बच कर निकले जोवो आगे आगे बढ़ता है  ;

हिम्मत जिसमें टकराने कीवो दुनिया से लड़ता है !

गर समझ गए इतना सा नुक़्तातो दिल्ली दूर नहीं ;

मत करो याद मंझधार को तुमसाहिल दूर नहीं  !

 

मत ढूंढो कमियां औरों मेंअपनी कमियां याद करो ;

औरों को बुरा कहने से पहलेअपनी नीयत याद करो !

ईश्वर बनने की उत्कंठा कोअपने दिल से दूर करो ;

खुद ही थोड़ा झुक जाओमत औरों को मजबूर करो !

गर नहीं है दिल में प्रेम का ज़ज़्बाअंत तुम्हारा दूर नहीं ;

मत करो याद मंझधार को तुमसाहिल दूर नहीं  !

 

भार उठा कर नन्हीं चींटीआखिर ऊपर तक चढ़ती है ;

 जाने कितनी बार फिसलतीपर पीछे नहीं हटती है !

विश्वास भरा हो जिसकी रग मेंकुछ भी वो कर सकता है ;       

वो लहरों से भी टकरा करसागर भी पार कर सकता है !

यूं ही तकते रहना औरों का सहाराईश्वर को मंजूर नहीं ; 

मत करो याद मंझधार को तुमसाहिल दूर नहीं  !

 

शांती स्वरूप मिश्र

 

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