#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

इन हवाओं की तासीर में, इतना वबाल क्यों है

यारो ज़िन्दगी का हर कदम, इक सवाल क्यों है

 

इतनी बड़ी है भीड़ फिर भी आदमी है तन्हा सा ,   

यहां हर किसी के चेहरे पे, इतना मलाल क्यों है

 

अपनी हदों में रह कर भी महफूज़ नहीं हम तो,

है हसरत हमें जीने की, पर जीना मुहाल क्यों है

 

लगा रहता है आदमी बस ज्यादा की तलाश में, 

सुकून का इस ज़िन्दगी में, इतना अकाल क्यों है

 

भर जाता है पेट उसका मगर नीयत नहीं भरती

मिश्रआदमी की सिफ़त में, इतना कमाल क्यों है

 

शांती स्वरूप मिश्र

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