#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

उम्र भर देखी हैं हमने, ये सियासतें कैसी कैसी

घुस चुकी हैं नस नस में, ये वहशतें कैसी कैसी

अब जीने की चाहतें भी मरने लगी हैं धीरे धीरे,

अब भरने लगी हैं दिल में, हिकारतें कैसी कैसी

इज़्ज़तों से खेलना ही आदमी का शगल है अब,

यूं दिखने लगी हैं सामने, ये सौहबतें कैसी कैसी

ख़ुदग़र्ज़ियों के धारे में बह गए  जाने कितने ही, 

देखी हैं उजड़ते हमने भी, ये रियासतें कैसी कैसी

भेजा था हमें तो खुदा ने सिर्फ मोहब्बतों के वास्ते

मगर देखी हैं इधर हमने, ये अदावतें कैसी कैसी

 समझो “मिश्रकि ज़िन्दगी खुशियों का खेल है,

भुगती हैं जाने हमने भी, ये जलालतें कैसी कैसी

 

शांती स्वरूप मिश्र

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