#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

कटती है पतंग तोउसकी कोई डगर नहीं होती  ! 

कहाँ पै जा अटकेगीकिसी को खबर नहीं होती !

ज़िन्दगी का पहिया कहाँ अटक जाये क्या पता,

कब थम जाएंगी सांसेंकिसी को खबर नहीं होती ! 

आदमी समेंटता है क्या क्या  जाने किसके लिए,

बाद मरने के क्या होगाकिसी को खबर नहीं होती !

ख़ुशी से जीना है तो लोगों के दिल में जियोवरना 

नफ़रत से भरे लोगों कीकिसी को खबर नहीं होती !  

शांती स्वरूप मिश्र

 

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