#Gazal by Shanti swaroop Mishra

हर जगह पर, साजिशों के सिवा कुछ न मिला

हर कदम पर, शातिरों के सिवा कुछ न मिला

टटोले हमने भी दिल न जाने कितनों के इधर,   

मगर कहीं पर, नफरतों के सिवा कुछ न मिला 

अपनी ज़िंदगी क्या है किसी को क्या बताते हम,

इसमें भी कहीं, आफतों के सिवा कुछ न मिला 

ख़्वाब पाले थे हमने भी मोहब्बत के कभी यारो,

पर उसमें भी, तिजारतों के सिवा कुछ न मिला 

सोचते रहे कि कोई भी हमसफ़र होता “मिश्र”,   

मगर अफसोस, ख़ल्वतों के सिवा कुछ न मिला

शांती स्वरूप मिश्र

 

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