#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

ज़रा सी ज़िन्दगी में, दुश्मन हज़ार हो गए

अपनों की टेढ़ी चाल से, हम बेज़ार हो गए

जब थे सितारे बुलंद तो नज़र आते थे सब,

जब आया दौरे मुफ़लिसी, तो फरार हो गए

इस मतलबी दुनिया में न बढ़ाता कोई हाथ,

अब पुरखों के वो उसूल, झूठा क़रार हो गए

अपनों से मिला दर्द दुखता है कुछ ज्यादा ही,

अब मोहब्बतों के इरादे भी, तार तार हो गए

न सोचिये कि राहे ज़िन्दगी आसान है “मिश्र”,

अब तो हर कदम पर, कांटे बे-सुमार हो गए

शांती स्वरूप मिश्र

 

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