#Gazal by Shanti swaroop Mishra

लोगों से किये वादों सेहमें मुकरना नहीं आता

औरों पर अपनी तोहमतेंहमें धरना नहीं आता

अब शौक बन गया है औरों के नुख़्स गिनने का,  

ऐसे फ़िज़ूल के झंझट मेंहमें पड़ना नहीं आता

खा चुके हैं धोखा  जाने कितनी मर्तबा हम तो,

पर ऐसे महान लोगों कोहमें परखना नहीं आता 

वो उगलते हैं शीरी जुबान से भी ज़हर अंदर का,

मगर ऐसे अजीब लोगों सेहमें बचना नहीं आता

घुस आते हैं वो दिल में ओढ़ के चोला शरीफों का

पर ऐसे शरीफ जादों कोहमें समझना नहीं आता

मिश्र” देखा है दुनिया में इन आँखों ने बहुत कुछ,

मगर किसी के बदहाल परहमें हँसना नहीं आता

 

शांती स्वरूप मिश्र

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