#Gazal by Shanti swaroop Mishra

यारो अपने पुराने ग़म को, ज़रा भुला के तो देखो !

मुश्किलों के दौर में भी, ज़रा मुस्करा के तो देखो !

समझ जाओगे ठीक से ज़िन्दगी का मतलब भी,

कुछ वक़्त साथ अपनों के, ज़रा बिता के तो देखो !

ये दौलतें ये सौहरतें रह जाएँगी लावारिस यहीं पे,

अपने दिलों से अपनी हवस, ज़रा हटा के तो देखो !

जाएगा भर खुशियों से इस ज़िन्दगी का हर लम्हा,

बस हर किसी से मोहब्बतें, ज़रा निभा के तो देखो !

यूं न थोपिए मायूशियाँ किसी के चेहरे पर “मिश्र”,

यारा रखा है क्या रुलाने में, ज़रा हंसा के तो देखो !

 

शांती स्वरूप मिश्र

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