#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

हर तरफ ही लोगों ने, जाल बिछा रखे हैं !

न जाने किस तरह के, स्वांग रचा रखे हैं !

भला कैसे पता करें हम असलियत उनकी,

चेहरे पे गुलाब, दिल में खार सजा रखे हैं !

कैसे हैं लोग जिनका न मोहब्बत से नाता,

उसकी जगह दिलों में, शैतान बसा रखे हैं !

कहने को हैं अपने मगर काम दुश्मन का,

हमारे दुश्मन भी उन्होंने, यार बना रखे हैं !

न बची है “मिश्र” भरोसे के लायक दुनिया,

अब सब ने उसूल अपने, ख़ास बना रखे हैं !

शांती स्वरूप मिश्र

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