#Gazal by Shanti swaroop Mishra

भई कमाते हैं गर नेता, तो क्या बुरा करते हैं

वो कुर्सी के लिए यारो, करोड़ों स्वाहा करते हैं

 

हमीं ने तो बनाया था, उनको सरदार अपना 

हाथ हमीं पे आजमाते हैं, तो क्या बुरा करते हैं

 

ये तो एक धंधा है, कमाना तो बनता है उनका

लोग नफे के वास्ते, क्या क्या न किया करते हैं

 

कहाँ है वक़्त उन पर, किसी का दर्द सुनने का 

वो तो रात दिन, दौलत कमाने की दुआ करते हैं

 

काबिलों की कमी नहीं है, हमारे देश में “मिश्र”

हम फिर भी न जाने क्यों, शातिर चुना करते हैं

 

शांती स्वरूप मिश्र

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