#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

अपने फ़रेबों के जाल, वो छुपाते क्यों हैं !

औरों में ख़म हज़ार, वो दिखाते क्यों हैं !

 

अँधेरे तो भरे हैं खुद के दिलों में उनके,     

फिर मंदिरों में शमाएं, वो जलाते क्यों हैं !

 

हर कोई तो वाकिफ़ है हरकतों से उनकी,  

फिर शराफ़तों का ढोल, वो बजाते क्यों हैं ! 

 

खुद ही तो गंवा देते हैं वो अपना यक़ीन

फिर औरों पे दोष सारा, वो लगाते क्यों हैं !

 

जब तोड़ देते हैं रिश्ते मतलबों के फेर में,

फिर रंजिशों की तोहमत, वो लगाते क्यों हैं !

शांती स्वरूप मिश्र

 

 

जब आता है तूफ़ान तो बस्तियां उजड़ जाती हैं  

जब पनपता है अहम् तो हस्तियां उजड़ जाती हैं

वक़्त के साथ कभी चिरौरियाँ मत करना “मिश्र” 

जब बिगड़ता है मिज़ाज़ तो मस्तियाँ उजड़ जाती हैं

 

शांती स्वरूप मिश्र

 

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