#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

कह नहीं पाता बच्चा फिरभी, माता सब कुछ लेती जान !
क्या है ज़रूरत बच्चे की, ये सब उसको हो जाता ज्ञान !

उसको भूख तभी लगती, जब बच्चे की भूख मिटा देती !
उसको नींद तभी आती, जब पहले बच्चे को सुला देती !

वो बच्चा जब यौवन पाता, ये सब कुछ कैसे जाता भूल !
मात पिता की हर शिक्षा, उसको क्यों लगती है प्रतिकूल !

उसकी हर इच्छा को पूर्ण किया, बिना किये कोई भी भूल !
मात पिता की लघु इच्छा भी, क्यों लगती है उसको सूल !

बीवी से ज्यादा इस दुनिया में, उसे प्यारा कोई और नहीं !
समझो उसके जीवन में, अब माता के लिये कोई ठौर नहीं !

बच्चों के लिये वो लाख लुटाये, मां के लिये वो कंगला है !
माता को कोई जगह नहीं, भले ही अपना गाड़ी बंगला है !

बीवी को कोई दुख ना पहुंचे, पर मां के दुख की खबर नहीं !
कुत्तों को खाना मिले समय पै, मां के पेट की खबर नहीं !

ये तो कुदरत का ही चक्र है यारो, अब इसमें कोई फेर नहीं !
अब ऐसी ही हालत होगी उसकी, अब इसमें ज्यादा देर नहीं !

जिन बच्चों पै उसने जान लुटाई, अब अपना धर्म निभाएंगे !
जैसे कर्ज़ उतारा अपनी माँ का, बैसे बच्चे भी फ़र्ज़ निभाएंगे !

शांती स्वरूप मिश्र

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