#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

जब सुबह सवेरे माँ जागी, तो आफत आई !
अब मेरे सर से उठ जायेगी, ये गरम रजाई !

फोड़ रहा तू अपनी किस्मत यूं सो कर,
उठ जा बेटा कर ले तू, मेहनत से ज़रा पढ़ाई !

मैं बोला माँ क्यों नींद उड़ा दी इतनी प्यारी,
फिर क्या था यारो, माँ ने अपनी छड़ी उठाई !

अब तक मैंने तेरी हर गलती को माफ़ किया,
जल्दी से उठ जा वरना, तेरी होगी मार पिटाई !

आती है मुझको याद आज भी वो अमृत घुट्टी,
मार मार कर पढ़ने की, जो माँ ने मुझे पिलाई !

वो ज्ञानवान थी उन्हें शिक्षा का महत्व पता था,
उनके सबक से हम बच्चों ने, पूरी करी पढ़ाई !

माँ सबक सिखा कर चली गईं इस दुनिया से पर,
जीवित है हर बात कभी, जो उसने हमें सिखाई !

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