#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

आये थे ऐसे कि, दिल में समा कर चले गए !
सो रहे थे चैन से, कि वो जगा कर चले गए !

न ठहरे वो इक पल भी मेरे गरीबखाने पर,
दिखा के बस झलक, जी दुखा कर चले गए !

न आया समझ कि ये हक़ीक़त है या सपना,
वो तो अजीब सी, हलचल मचा कर चले गए !

आये थे कुछ कहने मगर न कह सके शायद,
बस दिल की बातें, दिल में छुपा कर चले गए !

वैसे भी क्या कमी थी हमें रुसबाइयों की “मिश्र”,
जो यूंही ढेर सारी, मायूसियां बढ़ा कर चले गए !

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