#Gazal by SHANTI SWAROOP MISHRA

मैंने तो समझा कि, दर्द बंटाने आया था !
लगा कि दुःख में, साथ निभाने आया था !

दिखाए थे ज़ख्म सारे मरहम की आस में,
पर वो बेवफा तो, नमक लगाने आया था !

चढ़ा दिया हमको बिना पतवार कश्ती पर,
और हम समझे कि, पार लगाने आया था !

पानी से भरी गागर फोड़ दी उसने यूं ही,
हम समझ बैठे कि, प्यास बुझाने आया था !

न समझ पाए हम इस दुनिया को अब तक,
वो था कि दस्तूर-ए-जफ़ा, निभाने आया था !

252 Total Views 6 Views Today
Share This

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *