#Gazal by SHANTI SWAROOP MISHRA

कैसे हैं ये मौसम, जो सताने चले आते हैं !
फिर से याद उनकी, दिलाने चले आते हैं !

कभी इतराते हैं मोहब्बत के हसीन लम्हें,
कभी नफरतों के पल, रुलाने चले आते हैं !

पहले देते हैं लोग ग़मों का ज़हर खुद ही,
और बाद इसके, शोक जताने चले आते हैं !

कैसी है ये दुनिया और कैसे हैं लोग इसके,
कि दिल जलों के, दिल जलाने चले आते हैं !

अफ़सोस कि न देखता कोई भी घर अपना,
मगर औरों का घर, वो जलाने चले आते हैं !

सब जानते हैं “मिश्र” कि ज़रा सी है ज़िंदगी,
फिर भी आग इसमें, वो लगाने चले आते हैं !

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