#Gazal by SHANTI SWAROOP MISHRA

ये रात गुज़र जाए तो चले जाइएगा,
न रहे कोई अरमां तो चले जाइएगा !

बहुत बेचैन रहता है ये नादान दिल,
मैं समझा बुझा लूँ तो चले जाइएगा !

न जाने कितनी यादें बसी हैं दिल में,
उनको मैं भूल जाऊं तो चले जाइएगा !

मुद्दत के बाद तो आये हो तुम दोस्त,
ज़रा गुफ़्तगू कर लूँ तो चले जाइएगा !

ये कैसी है तड़प कैसी है हलचल “मिश्र”,
ये तूफ़ान गुज़र जाए तो चले जाइएगा !

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