#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

गर लगा दो भूख पर बंदिश, तो बात करो साहिब !

किसी यतीम को अपना लो, तो बात करो साहिब !

दिखाते हो क्यों हमदर्दियां झूठी हम अभागों पर,

गर लौटा सको वो बालपन, तो बात करो साहिब !

हम तो है मज़बूर यूं ही इस पेट की खातिर जनाब,

गर खिला सको हमें मुफ़्त में, तो बात करो साहिब !

गुज़र जाती है रातें बस सडकों के किनारे सो कर,

गर दे सको हमको भी ठाँव, तो बात करो साहिब !

लिखते हैं जाने कितने हमारी लाचारगी का मजमून,

गर लिख सको मुकद्दर हमारा, तो बात करो साहिब !

झूठी तसल्लियों की सियासत न खेलो हमसे “मिश्र”,

गर दे सको जीने की मोहलत, तो बात करो साहिब !

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