#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

हम तो क़तरों से खुश हैं, समंदर ले के क्या करेंगे,

जब भटकना है नसीब में, तो ठाँव ले के क्या करेंगे !

 

जरा सी हवा से बिखर जाती है ज़िंदगी तिनकों में,

फिर तू ही बता दोस्त, कि तूफ़ान ले के क्या करेंगे !

 

अजीबोगरीब चाहतों ने मिटा दिया इस आदमी को,

हमें चाहिए जब चार रोटी, अधिक ले के क्या करेंगे !

 

जो लूटते हैं दुनिया को न जाने किस किस तरह से,

भला ऐसे महान पुरुषों से, हम हुनर ले के क्या करेंगे !

 

जब चाहिए थी ज़रा सी महक तब न मिल सकी “मिश्र”,

जब आखिरी दिन आ गए, तब चमन ले के क्या करेंगे !

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