#Gazal by SHANTI SWAROOP MISHRA

इश्क़ से हमने तो यारो, बंदगी कर ली !
यूं ही तबाह बेकार में, ज़िन्दगी कर ली !

हमें तो उजाले दौड़ते हैं काटने को अब,
हमने तो चरागों की, गुल रोशनी कर ली !

अपनों की मोहब्बत ने धोखा दिया यारो,
इसलिए गैरों से हमने, आशिक़ी कर ली !

रखा है क्या हसीनों की महफ़िलों में “मिश्र’
छोड़ कर सब को, तन्हा ज़िन्दगी कर ली !

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