#Gazal by Shayar Himanshu Suthar

ग़ज़ल

 

हर मोड़ पर बदलते देखा है

अपनो को ही यूँ जलते देखा है

 

वो बात करते है दोस्त माफ़िक

दुश्मन को साथ चलते देखा है

 

उनको है नाज़ लेकिन हमने यूँ

सूरज को रोज ढलते देखा है

शायर हिमांशु सुथार

 

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