#Gazal by Shayar Himanshu Suthar

 

खिलती कलियों को कब तक दबाओगे तुम
बेटियों को यूँ कब तक सताओगे तुम

चहचहाती इस घर की तो चिड़िया है वो
कोख में ऐसे कब तक गिराओगे तुम
तोड़ कर दिल को जो देते धोखा है फिर
दिल किसी से यूँ कब तक लगाओगे तुम

जो उगलता है खुद आग भीतर से फिर
दीया सूरज को कब तक दिखाओगे तुम

सामने आएगा दुनिया के फिर कभी
ऐसे सच को यूँ कब तक छुपाओगे तुम

बात दिल में जो हो कह भी दो अब जरा
मिलने ऐसे फिर कब तक बुलाओगे तुम
💐शायर हिमांशु💐
2122-2221-2212

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