#Gazal by sheomurti tripathi

दिल में खुशफ़हमी रहे ऐसी कहानी दीजिये |
मेरे भीतर भी मोहब्बत की रवानी दीजिये ||

सर्दी गर्मी में झुलसते इन परिंदों के लिए |
रहम करके ए खुदा कुछ दाना पानी दीजिये ||

प्यार में मिलने विछ्ड़ने का चलन भी है यहाँ |
याद रखने के लिए कुछ तो निशानी दीजिये ||

ज़िन्दगी की तपिश सहकर थक चूका हूँ ए खुदा |
मेहरबानी करके अब तो रुत सुहानी दीजिये ||

तख्ते ताउस और दौलत की मुझे चाहत नही |
देना हो तो दिल की अपनी राजधानी दीजिये ||

दुनियादारी की चमक ‘चंद्रेश’को भाती नही |
रब की खुशबू से नहाई शब सुहानी दीजिये ||

शिव मूर्ति त्रिपाठी ‘चंद्रेश’

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