#Gazal by shivmurti tripathi chandresh

जान बूझ कर खैर न पूछो कैसा हूँ किस हाल में हूँ |
सबके जैसे मैं भी उलझा दुनिया के जंजाल में हूँ ||

काल बनी कुछ बड़ी मछलियाँ हम छोटों की ताक में हैं |
जान बचने खातिर दुबका डर कर मै शैवाल में हूँ ||

बदल रहा है राग पुराना बदल रहे सब अपने साज़ |
ऊपर वाले की रहमत से अब भी मै सुर ताल में हूँ ||

जब तक है धरती पर जीवन मुक्ति कर्म से कहाँ मिलेगी |
मुक्त हो चुका हूँ दफ्तर से घर में सेवा काल में हूँ ||

निशि दिन प्रेम धरा पर पनपे हर दिल में खुशहाली होवे |
चहुँ दिशि हो चंद्रेश उजाला हरपल इसी ख्याल में हूँ ||
चंद्रेश

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