#Gazal by Sidharth Arjun

तुम कहो तो बोल दूँ
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हमको किसने कैसे मारा तुम कहो बोल दूँ,
रूह में खंजर उतारा तुम कहो तो बोल दूँ।
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आये थे वो आँख का काजल चुराने के लिये,
ख़्वाब भी छीना हमारा तुम कहो तो बोल दूँ।
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धड़कनों की हर धड़क में अब तलक़ जो है मेरे,
मुझको पत्थर उसने मारा तुम कहो तो बोल दूँ।
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प्यासी धरती चीखती थी ,चीखती ही रह गयी,
मेघ न बरसा दुबारा तुम कहो तो बोल दूँ।
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कैसे टूटी टहनियों से पत्तियां कैसे कहे,
पेड़ था पतझड़ का मारा तुम कहो तो बोल दूँ।
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रेत का कतरा गया जब सागरों की सैर पर,
भूल बैठा वो किनारा तुम कहो तो बोल दूँ।
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सोंचता था इस शहर में कुछ तबाही कर ही दूँ,
दिख गया पर घर हमारा तुम कहो तो बोल दूँ।
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गैर तो “सिद्धार्थ” तेरे गीत गाते प्रेम से,
तुझको तो अपनों ने मारा तुम कहो तो बोल दूँ।
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कवि सिद्धार्थ अर्जुन
छात्र इलाहाबाद विश्वविद्यालय
9792016971

One thought on “#Gazal by Sidharth Arjun

  • November 2, 2018 at 5:41 am
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    धन्यवाद आदरणीय पोस्ट के लिए

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