#Gazal by Sudesh Dixit

हमें भी कभी बाहों में झूला लो ।

हमें भी कभी पास अपने बुला लो ।।

ख्वाव देखना चाहता है दिल कब का ।

बना बिस्तर आगोस का हमे सुला लो ।।

 

तडपा है दिल हर पल तेरी याद मे ।

यकीं न हो तो जी भर कर रूला लो ।।

 

याद आयेंगे हम भले ही भूल जाओ  तुम ।

मर्जी चाहे तुम मुझे जितना हमें भूला लो ।।

 

नहीं उठेगा धूआं राख से अब कभी ।

भले ही तुम हमारा दिल जला लो ।।

 

यकीं होगा कैसे तुम दीक्षित की हो ।

कसमें झूठी जितनी मर्जी खा लो।।

 

सुदेश दीक्षित

बैजनाथ कांगडा हि  प्र

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