#Gazal by Sufi Jakir Nawazi

गजल

हो चुके शिकवे बहुत ,इसी में न बात ख़त्म हो जाए।
आओ , अब मिलने मिलाने की रस्म हो जाए ।

बिखरे बिखरे से है मेरे अल्फाजे ज़िन्दगी ,
समेट दो करीने से कि कोई नज्म हो जाए ।

उदास दिल में है वस्ल की रंगीन यादें,
आ जाओ कि फिर वही हसीं बज्म हो जाए ।।

इस कदर न जोश दिलाओ मेरी खाहिशों को,
तेरी जुस्तजू ही न ज़िन्दगी का अज्म हो जाए ।

सूफी जाकिर ” नवाजी “

Leave a Reply

Your email address will not be published.