#Gazal by Sufi Jakir Nawazi

गज़ल

 

भर दूंगा तेरी मांग सितारों से मैं  ,

हालात के सूरज को सर्द हो जाने दो  ।

 

तेरी हसीन तमन्नाओं का खयाल हैं मुझे भी  ,

बस ,उस शबे फुरसत को आ जाने दो  ।

 

हैं बहुत आरजू तुझे आंखो में छिपाने की ,

जमाने की रेत को आंखों से निकल जाने दो  ।

 

तुम ख्वाबे हसीं हो, मंजिल हो, मेरी जिन्दगानी,

राह की उलझनो से थोड़ा सुलझ जाने दो  ।

 

करता हूँ मैं तदबीर, तकदीर पलट लाती हैं  ,

ऐ मेरे हमदम जरा दोनों में सुलह हो जाने दो  ।

 

तुम अपनी आँखों में चराग जलाए रखना  ,

मैं आऊंगा बस थोड़ा सम्भल जाने दो  ।

 

सूफी जाकिर “नवाजी ”

 

 

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