#Gazal by Suresh Tiwari

अर्ज किया है.,,,,…..,,,,….,,,,…..,,,,…..,,,,…!!!

 

होटल पे गुमटियों पे सियासत की दुकानें..!

संसद में सज रही हैं अदावत की दुकानें…!!

 

पंचायते जो खा गयीं प्रेमी युगल को कल..!

अब खोल के बैठी हैं मुहब्बत की दुकानें.. ¡!

 

महफिल में इसी बात की चर्चा है रात- दिन …!!

तन्हा भटक रही हैं नफासत की दुकानें..!!

 

हर मर्ज का इलाज अगर मन की बात है…!

फिर क्यूँ मुखर हुयीं ये मजम्मत की दुकानें…!!

 

देखा जो उसे मुद्दतों के बाद इक नजर…!

शमशीर लिये आयीं इबादत की दुकानें..!!

 

चिड़िया कनक की कैद हुयी  स्विस  बैंक में…!

पीतल परोसती हैं सियासत की दुकानें…!!

 

आँखों को मेरे  चूम लिया उसने आँख से …!

जल- भुन के जल रहीं हैं बगावत की दुकानें….!!

 

बेटे ने छीन करके तख्तो -ताज- सल्तनत ..!

बापू को सौंप दी है हजामत की दुकानें….!!

 

जाकर तिहाड़ जेल में बैठे हैं वो मियां..!

जो रोज सजाते थे शराफ़त की दुकानें…!!

 

बैशाखियों के बल पे जो हुक्काम बन गये…!

जहनो – जिगर में उनके जहालत की दुकानें…!!

 

कवि सुरेश सैनिक श्रावस्ती … 9236717074

 

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