#Gazal by Tejvir Singh Tej

वतन के सिपाहियों को समर्पित

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लहू दान दे सरहदों पे डटे हैं।
वतन के सिपाही वतन पे मिटे हैं।

किया इश्क़ वर्दी औ जान-ए-चमन से।
चढ़ा शीश अपना ख़ुशी से कटे हैं।

उदासी न दिल में नहीं खौफ़ कोई।
चहे जान जाये मगर ना हटे हैं।

हिफ़ाजत सदा कर रहे भारती की।
बमों-गोलियों के मुहाने सटे हैं।

शरीरों में भर-भर के बारूदी जज़्बे।
समरभूमि में ज्यों तिरंगे अटे हैं।

शहादत तुम्हारी खुशाली चमन की।
बमों की तरहा दुश्मनों पे फ़टे हैं।

अगर याद आई कभी घर-गली की।
बहाये न आंसू न मग से हटे हैं।

नमन् कोटि-कोटी अटल हौसलों को।
सदा तेज नारे वतन के रटे हैं।

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