#Gazal by V.K. Anjan

जैसा सुनते हो मैं वैसा भी हुआ करता था !!
अब बुरा हूँ कभी अच्छा भी हुआ करता था !!

वो जो कहते हुए फिरता है किसी और का हूँ,
इक ज़माने में मैं उसका भी हुआ करता था !!

इन दिनों इश्क़ में मसरूफ़ बहुत रहता हूँ,
उन दिनों इश्क़ में तन्हा भी हुआ करता था !!

एक तस्वीर पुरानी सी बताती है मुझे,
मैं किसी दौर में ऐसा भी हुआ करता था !!

अब तो बस एक अदाकार की आवाज़ हूँ मैं,
इससे पहले मेरा चेहरा भी हुआ करता था !!

तुमको शायद न हो वो याद के बरसों पहले,
गांव में एक सपेरा भी हुआ करता था !!

अब तो दीवार ही दीवार है हर सू लेकिन,
पहले इस सहन में रस्ता भी हुआ करता था !!
-वी.के.’अनजान’
-श्रीगंगानगर(राज.)

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