#Gazal by Vashudev Agrwal Naman

ग़ज़ल (आज फैशन है)

 

1222  1222  1222  1222

 

लतीफ़ों में रिवाजों को भुनाना आज फैशन है,

छलावा दीन-ओ-मज़हब को बताना आज फैशन है।

 

ठगों ने हर तरह के रंग के चोले रखे पहने,

सुनहरे स्वप्न जन्नत के दिखाना आज फैशन है।

 

दबे सीने में जो शोले जमाने से रहें महफ़ूज़,

पराई आग में रोटी पकाना आज फैशन है।

 

कभी बेदर्द सड़कों पे न ऐ दिल दर्द को बतला,

हवा में आह-ए-मुफ़लिस को उड़ाना आज फैशन है।

 

रहे आबाद हरदम ही अना की बस्ती दिल पे रब,

किसी वीराँ जमीं पे हक़ जमाना आज फैशन है।

 

गली कूचों में बेचें ख्वाब अच्छे दिन के लीडर अब,

जहाँ मौक़ा लगे मज़मा लगाना आज फैशन है।

 

इबादत हुस्न की होती जहाँ थी देश भारत में,

नुमाइश हुस्न की करना कराना आज फैशन है।

 

नहीं उम्मीद औलादों से पालो इस जमाने में,

बड़े बूढ़ों के हक़ को बेच खाना आज फैशन है।

 

नहीं इतना भी गिरना चाहिए फिर से न उठ पाओ,

गिरें जो हैं उन्हें ज्यादा गिराना आज फैशन है।

 

तिज़ारत का नया नुस्ख़ा है लूटो जितनी मन मर्ज़ी,

‘नमन’ मज़बूरियों से धन कमाना आज फैशन है।

 

बासुदेव अग्रवाल ‘नमन’

तिनसुकिया

 

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