#Gazal by Vicky Jane

आदमी यहा पल दो पल का मेहमान है यारों!

फिर भी उसे ख़ुद पर बहोत गुमान है यारों!!

 

कद्र नहीं है यहा जीते-जागते इंसान की,

यहा जो पत्थर है वो भगवान है यारों!

 

जैसे यहा पर जमीन है पौधा उगाने के लिए,

पानी बरसाने के लिए यहा आसमान है यारों!!

 

मुस्कुराता है वो बस दुनिया को दिखाने के लिए,

लेकिन अंदर से आदमी बहोत परेशान है यारों!!

 

आती नहीं है नींद मुझे संगमरमर की हवेली में,

कुटिया मेरी मेरे लिए बहोत आलिशान है यारों!!

…….. ✍ ✍ ✍ ✍

विक्की जाने

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