#Gazal by Vidgya Shankar Vidhyarthi

गजल

हँस हँस के जिंदगी के समुझा लिहलीं हम
कसक के बात छोड़$, रिझा लिहलीं हम

दुनिया में बा जीए के सीए के दरकल परी
दम देके बिहरल छाती फुला लिहलीं हम

आँखी में लोर के खुशी बइर के काँट लागे
नफरत के जगे प्रेम के अँकुआ लिहलीं हम

अधूरा कहकेे केहू अधूरा रखल जीगर में
अंदाज आधा से आधा पुरा लिहलीं हम

जिंदगी रे जिंदगी तूँ जिंदगी के भइलिस
जिंदगी आई रे कामे समुझा लिहलीं हम |

विद्या शंकर विद्यार्थी

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